Uncategorized, चंद्रकांता संतति

चंद्रकांता संतति भाग1 बयान15.2

तारा – पहले उन्हीं दोनों की खबर ली जाएगी।
भैरो – नहीं-नहीं इसकी कोई जरूरत नहीं। उन्हें गिरफ्तार किये बिना ही हमारा काम चल जायगा, व्यर्थ कई दिन बर्बाद करने का मौका नहीं है।
तारा – हां यह ठीक है, हमें उनकी इतनी जरूरत भी नहीं है, और क्या ठिकाना जब तक हम लोग अपना काम करें तब तक वे चाची के फंदे में आ फंसें।
भैरो – बेशक ऐसा ही होगा, क्योंकि उन्होंने कहा भी था कि तुम लोग इस काम को करो तब तक बन पड़ेगा तो मैं ललिता और तिलोत्तमा को भी फांस लूंगी।
बद्री – खैर जो होगा देखा जाएगा, अब हम लोग अपने काम में क्यों देर कर रहे हैं।
भैरो – देर की जरूरत क्या है, उठिए, हां, पहले अपना-अपना शिकार बांट लीजिए।
बद्री – दीवान साहब को मेरे लिए छोड़िये।
भैरो – हां, आपका वजन बराबर है, अच्छा मैं सेनापति की खबर लूंगा।
तारा – तो वह चाण्डाल कोतवाल मेरे बांटे पड़ा! खैर यही सही।
भैरो – अच्छा अब यहां से चलो।
ये तीनों ऐयार वहां से उठे ही थे कि दाहिनी तरफ से छींक की आवाज आर्ई।
बद्री – धत्तेरे की, क्या तेरे छींकने का कोई दूसरा समय न था
तारा – क्या आप छींक से डर गये
बद्री – मैं छींक से नहीं डरा मगर छींकने वाले से जी खटकता है।
भैरो – हमारे काम में विघ्न पड़ता दिखाई देता है।
बद्री – इस दुष्ट को पकड़ना चाहिए, बेशक यह चुपके-चुपके हमारी बातें सुनता रहा।
तारा – छींक नहीं बदमाशी है!
बद्रीनाथ ने इधर-उधर बहुत ढूंढ़ा मगर छींकने वाले का पता न लगा।
लाचार तरद्दुद ही में तीनों वहां से रवाना हुए।

चंद्रकांता संतति का पहला भाग समाप्त     ।    दूसरा  भाग शीघ्र आ रहा है |

1 Comment

  1. Articles like this really grease the shafts of knwdleoge.

Leave a Reply

Theme by Anders Norén