कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा कार्तिक पूर्णिमा कहलाती है। सृष्टि के आरंभ से ही यह तिथि बड़ी ही खास  रही है। पुराणों में इस दिन स्नान, व्रत व तप की दृष्टि से मोक्ष प्रदान करने वाला बताया गया है।

सनातन धर्म में कार्तिक मास का विशेष महत्व होता है। उत्सवों का मास है कार्तिक मास। मान्यता है कि कार्तिक में हर नदी का जल गंगा के समान हो जाता है। पूरे साल किए जाने वाले स्नान के फल का पुण्य सिर्फ कार्तिक स्नान पर मिल जाता है। कार्तिक में लगाई गई एक डुबकी से कुंभ स्नान के समान फल मिलता है। कार्तिक मास की महिमा का बखान स्कंद पुराण, नारद पुराण, पद्मपुराण जैसे ग्रंथों में  मिलता है। इसी माह में प्रबोधनी एकादशी होती है। जैसे सतयुग के समान कोई युग नहीं, वेदों के समान कोई शास्त्र नहीं, गंगा के समान कोई तीर्थ नहीं, वैसे ही कार्तिक के समान कोई मास नहीं।

बेहद खास है तिथि
कार्तिक मास सभी मासों में श्रेष्ठ है। स्वयं ब्रह्मा ने नारद को बताया कि कार्तिक में किया जाने वाला पुण्य अक्षय रहता है। इस महीने में 33 करोड़ देवी-देवता धरती पर, मनुष्य की सारी मनोकामनाएं पूरी करने आते हैं। यही नहीं, कार्तिक मास में तुलसी विवाह के बाद से सभी मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा कार्तिक पूर्णिमा कहलाती है। हर माह में पूर्णिमा तिथि होती है। सृष्टि के आरंभ से ही यह तिथि बड़ी ही खास रही है। पुराणों में इस दिन स्नान, व्रत व तप की दृष्टि से मोक्ष प्रदान करने वाला बताया गया है।

महत्व
इसका महत्व सिर्फ वैष्णव भक्तों के लिए ही नहीं शैव भक्तों और सिख धर्म के लिए भी बहुत ज्यादा है। विष्णु के भक्तों के लिए यह दिन इसलिए खास है क्योंकि भगवान विष्णु का पहला अवतार इसी दिन हुआ था। प्रथम अवतार में भगवान विष्णु मत्स्य यानी मछली के रूप में थे। भगवान को यह अवतार वेदों की रक्षा, प्रलय के अंत तक सप्तऋषियों, अनाजों एवं राजा सत्यव्रत की रक्षा के लिए लेना पड़ा था। इससे सृष्टि का निर्माण कार्य फिर से आसान हुआ।

त्रिपुरी पूर्णिमा
शिव भक्तों के अनुसार इसी दिन भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक असुर का संहार किया था। इससे देवगण बहुत प्रसन्न हुए और भगवान विष्णु ने शिव को त्रिपुरारी नाम दिया जो शिव के अनेक नामों में से एक है। इसे त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहते हैं।
ऐसा भी माना जाता है कि इस दिन कृतिका में शिव शंकर के दर्शन करने से सात जन्म तक व्यक्ति ज्ञानी और धनवान होता है। इस दिन चन्द्र जब आकाश में उदित हो रहा हो उस समय शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा इन छह कृतिकाओं का पूजन करने से शिव की प्रसन्नता प्राप्त होती है।

गुरु नानक देव की जयंती
इसी तरह सिख धर्म में कार्तिक पूर्णिमा के दिन को प्रकाश उत्सव के रूप में मनाया जाता है। क्योंकि इसी दिन सिख संप्रदाय के संस्थापक गुरु नानक देव का जन्म हुआ था। इस दिन सिख संप्रदाय के अनुयायी सुबह स्नान कर गुरुद्वारों में जाकर गुरुवाणी सुनते हैं और नानक के बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लेते हैं। इसे गुरु पर्व भी कहा जाता है।

 

इस तरह यह दिन एक नहीं बल्कि कई वजहों से खास है। इस दिन गंगा-स्नान, दीपदान, अन्य दानों का भी विशेष महत्तव है।

स्नान-दान का महत्व
कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान, दीप दान, हवन, यज्ञ आदि करने से सांसारिक पाप और ताप का शमन होता है। इस दिन किए जाने वाले अन्न, धन एवं वस्त्र दान का भी बहुत महत्व है। इस दिन जो भी दान किया जाता हैं उसका कई गुणा लाभ मिलता है। मान्यता यह भी है कि इस दिन व्यक्ति जो कुछ दान करता है वह उसके लिए स्वर्ग में संरक्षित रहता है जो मृत्यु लोक त्यागने के बाद स्वर्ग में उसे पुन:प्राप्त होता है। शास्त्रों में वर्णित है कि कार्तिक पुर्णिमा के दिन पवित्र नदी व सरोवर एवं धर्म स्थान में जैसे, गंगा, यमुना, गोदावरी, नर्मदा, गंडक, कुरूक्षेत्र, अयोध्या, काशी में स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।