��राधा रानी जी का नाम ही एक महा मंत्र
है.संतो ने राधा रानी जी बारे में कहा है
कि – “जाको न मंत्र महा जो स्वतंत्र”
राधा में ‘रा’ धातु के बहुत से अर्थ होते हैं.
देवी भागवत में इसके बारे में
लिखा है कि जिससे समस्त कामनायें, कृष्ण
को पाने की कामना तक भी, सिद्ध
होती हैं. सामरस उपनिषद में वर्णन आया है
कि राधा नाम क्यों पड़ा ?
��राधा के एक मात्र शब्द से जाने कितने जन्मो के
पाप नष्ट हो जाते है
र शब्द का अर्थ है = जन्म-जन्मान्तर के
पापो का नाश
अ वर्ण का अर्थ है =मृत्यु, गर्भावास,आयु हानि से
छुटकारा
ध वर्ण का अर्थ है =श्याम से मिलन
अ वर्ण का अर्थ है =सभी वन्धनो से छुटकारा
राधा रानी जी को भजने के लिए किसी मंत्र
की जरुरत नहीं है राधा रानी के
सोलह नाम पुराणों में प्रसिद्द है उन
नामो का मात्र जयकारा करने से
ही व्यक्ति का कल्याण होता है.हम उन्हें समझकर
उनका अर्थ जानने का प्रयास
करे.
“जय जय श्री राधे “