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नन्द बाबाजी को छैया, मैं हरि बिन क्यूँ जियूँ री माई, श्याम आये नैनों में – श्याम भजन

नन्द बाबाजी को छैया

नन्द बाबाजी को छैया …..

नंद बाबाजी को छैया वाको नाम है कन्हैया .
कन्हैया कन्हैया रे ..

बड़ो गेंद को खिलैया आयो आयो रे कन्हैया .
कन्हैया कन्हैया रे ..

काहे की गेंद है काहे का बल्ला
गेंद मे काहे का लागा है छल्ला
कौन ग्वाल ये खेलन आये
खेलें ता ता थैया ओ भैया .
कन्हैया कन्हैया रे ..

रेशम की गेंद है चंदन का बल्ला
गेंद में मोतियां लागे हैं छल्ला
सुघड़ मनसुखा खेलन आये
बृज बालन के भैया कन्हैया .
कन्हैया कन्हैया रे ..

नीली यमुना है नीला गगन है
नीले कन्हैया नीला कदम्ब है
सुघड़ श्याम के सुघड़ खेल में
नीले खेल खिलैया ओ भैया .
कन्हैया कन्हैया रे ..

मैं हरि बिन क्यूँ जियूँ री माई

मैं हरि बिन क्यूं जिऊं री माई॥

पिव कारण बौरी भई, ज्यूं काठहि घुन खाई॥
मैं हरि बिन क्यूं जिऊं री माई॥

ओखद मूल न संचरै, मोहि लाग्यो बौराई॥
मैं हरि बिन क्यूं जिऊं री माई॥

कमठ दादुर बसत जल में जलहि ते उपजाई।
मैं हरि बिन क्यूं जिऊं री माई॥

मीन जल के बीछुरे तन तलफि करि मरि जाई॥
मैं हरि बिन क्यूं जिऊं री माई॥

पिव ढूंढण बन बन गई, कहुं मुरली धुनि पाई।
मैं हरि बिन क्यूं जिऊं री माई॥

मीरा के प्रभु लाल गिरधर मिलि गये सुखदाई॥
मैं हरि बिन क्यूं जिऊं री माई॥ 

श्याम आये नैनों में

श्याम आये नैनों में
बन गयी मैं साँवरी

शीश मुकुट बंसी अधर
रेशम का पीताम्बर
पहने है वनमाल, सखी
सलोनो श्याम सुन्दर
कमलों से चरणों पर
जाऊँ मैं वारि री

मैं तो आज फूल बनूँ
धूप बनूँ दीप बनूँ
गाते गाते गीत सखी
आरती का दीप बनूँ
आज चढ़ूँ पूजा में
बन के एक पाँखुड़ी।।।।

1 Comment

  1. I’m not easily imrespsed but you’ve done it with that posting.

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