आरती – जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश, देवा .
माता जाकी पारवती, पिता महादेवा ..

एकदन्त, दयावन्त, चारभुजाधारी,
माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी .
पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा,
लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा ..

अंधे को आँख देत, कोढ़िन को काया,
बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया .
‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा,
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ..

गाइये गणपति जगवंदन

गणपति बप्पा की जय बोलो

शुभ दिन प्रथम गणेश मनाओ

शुभ दिन प्रथम गणेश मनाओ

कार्य सिद्धि की करो कामना ।
तुरत हि मन वान्छित फल पाओ ।

अन्तर मन हो ध्यान लगाओ ।
कृपा सिन्धु के दरशन पाओ ।

श्रद्धा भगति सहित निज मन मे ।
मंगल दीप जलाओ जलाओ ।

सेन्दुर तुलसी मेवा मिसरी ।
पुष्प हार नैवेद्य चढ़ाओ ।

मेवे मोदक भोग लगाकर ।
लम्बोदर का जी बहलाओ ।

एक दन्त अति दयावन्त हैं।
उन्हें रिझावो नाचो गाओ ।

सर्व प्रथम गण नाथ मनाओ

 

श्री गणपति ध्यान तथा आवाहन

विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय,
लम्बोदराय सकलाय जगत्‌ हिताय ।
नागाननाय श्रुतियज्ञभूषिताय,
गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते ॥
ॐ भूर्भुवः स्वः गणपते !
इहागच्छ इहातिष्ठ सुप्रतिष्ठो भव
मम पूजा गृहाण !
गणानान्त्वा गणपति (गुँ) हवामहे
प्रियाणान्त्वा प्रियपति (गुँ) हवामहे
निधिनान्त्वा निधिपति (गुँ) हवामहे
वसो मम ।
आहमजानि गर्भधमात्वमजासि गर्भधम्‌ ॥

देवों के प्रिय विघ्ननियन्ता, लम्बोदर भव-भय हारी ।
गिरिजानन्दन देव गजानन, यज्ञ-विभूषित श्रुतिधारी ॥
मंगलकारी दुःख-विदारी, तेजोमय जय वरदायक ।
बार-बार जय नमस्कार, स्वीकार करो हे गणनायक ॥

देव आइये यहाँ बैठिये, पूजा को करिये स्वीकार ।
भूर्भुवः स्वः सुख समृद्धि के, खोल दीजिये मंगल द्वार ॥

गणनायक वर बुद्धि विधायक, सदा सहायक भय-भंजन ।
प्रियपति, अति प्रिय वस्तु प्रदायक, जगत्राता जन-मन-रंजन ॥
निधिपति, नव-निधियों के दाता, भाग्य-विधाता भव-भावन ।
श्रद्धा से हम करते सादर, देव! आपका आवाहन ॥
विश्व उदर में टिका आपके, विश्वरूप गणराज महान ।
सर्व शक्ति संचारक  तारक, दो अपने स्वरूप का ज्ञान ॥