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राम कृष्ण कहिये उठि भोर, पिया सों मिलन कैसे होय री, आओ आओ यशोदा के लाल, करुणा भरी पुकार सुन, दूजा नाहीं मन भायो – भजन

राम कृष्ण कहिये उठि भोर

हे राम, राम,
राम राम राम,
मेरे राम, मेरे राम

राम कृष्ण कहिये उठि भोर
राम कृष्ण कहिये उठि भोर

राम कृष्ण कहिये उठि भोर
राम कृष्ण कहिये उठि भोर
राम
राम
राम कृष्ण कहिये उठि भोर

अवध ईश ये धनुष धरे हैं
वो बृज माखन चोर

अवध ईश ये धनुष धरे हैं
वो बृज माखन चोर

राम, हरे राम राम राम
राम
राम कृष्ण कहिये उठि भोर
राम कृष्ण कहिये उठि भोर

इनके छत्र चंवर सिंघासन
इनके छत्र चंवर सिंघासन

भरत शत्रुहन लक्ष्मण जोर
भरत शत्रुघन लछमन जोर

उनके लकुट मुकुट पीताम्बर
उनके लकुट मुकुट पीताम्बर
नित गैयन संग नंदकिसोर
नित गैयन संग नंदकिसोर

राम कृष्ण कहिये उठि भोर
राम कृष्ण कहिये उठि भोर
राम कृष्ण कहिये
राम कृष्ण कहिये उठि भोर
राम कृष्ण कहिये उठि भोर

उठि भोर
उठि भोर

इन सागर में शिला तराई
इन सागर में सिला तराई

अरे, उन राख्यो गिरि नख की  कोर
उन राख्यो गिरि
उन राख्यो गिरि नख की कोर

‘नंददास’ प्रभु सब तज भजिये
‘नंददास’ प्रभु सब तज भजिये
जैसे, जैसे  निरखत  चंद्र चकोर

राम कृष्ण कहिये उठि भोर
राम कृष्ण कहिये उठि भोर
राम कृष्ण कहिये उठि भोर
राम कृष्ण कहिये उठि भोर

राम
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे .
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ..

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे .
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ..

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे .
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे .

 

पिया सों मिलन कैसे होय री

हरे कृष्ण हरे कृष्ण
राधे कृष्ण कृष्ण कृष्ण

मैं जानूँ नहीँ
पिया सों मिलन कैसे होय री

कृष्ण कृष्ण कृष्ण

हर आहट पे सोच लेती
आये होंगे सांवरियां
धड़ धड़ धड़के लागे जियरा
लूंगी उनकी खबरिया
आये नाहिं संवरिया
मैं जानूँ नहीँ
पिया सों मिलन कैसे होय री

हरे कृष्ण राधे कृष्ण राधे कृष्ण

कृष्ण कृष्ण कृष्ण

मन ही मन में बातें होती
मैं जो कहना चाहूं
सामने आते तोय सांवरिया
मैं ठगी रह जाऊं
मूरत बन रह जाऊँ
मैं जानूँ नहीँ
पिया सों मिलन कैसे होय री

कृष्ण कृष्ण कृष्ण

कई जन्मों से बिछड़ बिछड़ कर
अब तो रहा न जाए
हाथ पकड़ ले मधु सांवरिया
अब तो चला न जाए
अपने अंग लगा ले
जानूँ नाहीं
पिया सों मिलन कैसे होय री

 

आओ आओ यशोदा के लाल

करुणा भरी पुकार सुन

करुणा भरी पुकार सुन अब तो पधारो मोहना ..

कानन कुण्डल शीश मुकुट गले बैजंती माल हो .
सांवरी सूरत मोहिनी अब तो दिखा दो मोहना ..

कृष्ण तुम्हारे द्वार पर आया हूँ मैं अति दीन हूँ .
करुणा भरी निगाह से अब तो पधारो मोहना ..

पापी हूँ अभागी हूँ दरस का भिखारी हूँ .
भवसागर से पार कर अब तो उबारो मोहना .

 

दूजा नाहीं मन भायो

जब से तोरे संग नेहा लागे कान्हा
दूजा नाहिं मन भायो
दूजा नाहीं मन भायो

मनवा मोरा इत उत डोलत
इक पल चैन न पाए
तोरी प्रीत की डोरी संग बंध
इत उत जा ना पाए
चरणों में मुझे ले लो प्रभुजी
अब ना भटका जाए
आ जा रे मोरे कान्हा
आ जा रे (३)

दोउ नैना बाट निहारे तोरी
हर पल बरसत जाए
आवन की तोरी आस ले कर
इक पल झपक ना पाए
मन मंदिर में आ जा प्रभुजी
अब ना जाने दूंगी
आ जा रे मोरे कान्हा तू
आ जा रे (३)

मन ही तेरा कृष्ण कन्हैया
मन ही तेरी राधा
जग में रह कर जो भी करता
है उसकी अभिलाषा
दे ऐसा वरदान मधु अब
मधु श्याम मन भाये
आ जा रे मोरे कान्हा तू
आ जा रे (३)

1 Comment

  1. It’s great to find somneoe so on the ball

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